
प्रस्तावित उद्धरण: नितिन बस्सी, साइबा गुप्ता और कार्तिकेय चतुर्वेदी. 2023. रियूज ऑफ ट्रीटेड वेस्टवॉटर इन इंडिया: मार्केट पोटेंशियल एंड रिकमेंडेशंस फॉर स्ट्रेंथनिंग गवर्नेंस नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर.
डिस्क्लेमर : यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
अपशिष्ट जल की प्रचुर मात्रा को देखते हुए, भारत में उचित अपशिष्ट जल प्रबंधन (wastewater management) के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने और अपने जल संबंधी पर्यावरण (water environment) में सुधार लाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यह अध्ययन भारत में उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्उपयोग को मुख्यधारा में लाने का समर्थन करता है। यह अध्ययन उपचारित अपशिष्ट जल (घरेलू सीवेज) को राष्ट्रीय स्तर पर सिंचाई के लिए दोबारा इस्तेमाल करने की आर्थिक और बाजार संभावनाओं का भी आकलन करता है और इसे दोबारा उपयोग में लाने के लिए मौजूदा व्यवस्था को मजबूत बनाने का भी सुझाव देता है।
भारत में जल सुरक्षा एक अत्यधिक महत्वपूर्ण विषय है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के नदी घाटियों (बेसिन) में जल उपलब्धता (सीडब्ल्यूसी 2021) के अनुमानों पर आधारित हमारे विश्लेषण के अनुसार, 2025 तक भारत में 15 प्रमुख नदी घाटियों में से 11 नदी घाटियों में जल संकट दिखाई देगा, जहां वार्षिक प्रति व्यक्ति नवीकरणीय जल उपलब्धता (renewable water availability) 1,700 क्यूबिक मीटर से कम होगी। इसलिए, मांग-आपूर्ति में मौजूद अंतर को भरने के लिए जल के वैकल्पिक स्रोतों को खोजना जरूरी है।
भारत में शहरी केंद्रों से प्रतिदिन निकलने वाले कुल अपशिष्ट जल के केवल 28 प्रतिशत हिस्से का ही ट्रीटमेंट (शोधन) हो पाता है (सीपीसीबी 2021)। शहरी केंद्रों से 72,368 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) सीवेज निकलता है, जिसमें से वास्तविक रूप से सिर्फ 20,236 एमएलडी सीवेज का शोधन होता है (सीपीसीबी 2021)। श्रेणी-I शहर (जिनकी आबादी 1,00,000 से अधिक है) और श्रेणी-II शहर (जिनकी आबादी 50,000-99,999 के बीच है) कुल शहरी आबादी के एक बड़े हिस्से (72 प्रतिशत) का प्रतिनिधित्व करते हैं और यहां से निकलने वाले अनुमानित 38,254 एमएलडी सीवेज में से केवल 30 प्रतिशत का वास्तविक रूप से शोधन होता है (सीपीसीबी 2021)। गैर-उपचारित अपशिष्ट जल नदी जैसे मीठे जल निकायों में चला जाता है।
अपशिष्ट जल की प्रचुर मात्रा को देखते हुए, भारत में उचित अपशिष्ट जल प्रबंधन (wastewater management) के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने और अपने जल संबंधी पर्यावरण (water environment) में सुधार लाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।इस अध्ययन के माध्यम से, हमारा उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर उपचारित अपशिष्ट जल (घरेलू सीवेज) के पुनर्उपयोग से जुड़ी बाजार संभावनाओं का अनुमान लगाना और पुनर्उपयोग से संबंधित व्यवस्था को मजबूत बनाने के बारे में सुझाव देना है।
हमने निम्नलिखित प्रयास किए हैं:
उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्उपयोग की आर्थिक और बाजार संभावनाएं
चित्र ईएस1: 2021 में उपलब्ध उपचारित अपशिष्ट जल का इस्तेमाल करके 1.38 एमएचए क्षेत्र की सिंचाई की जा सकती थी
स्रोत: भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय (एमओडब्ल्यूआर) के नेशनल कमीशन फॉर इंटीग्रेटेड वॉटर रिसोर्सेज डेवलपमेंट प्लान (1999), जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार की रिपोर्ट के आंकड़ों के आधार पर लेखकों का विश्लेषण
चित्र ES 2: 2021 में उपचारित अपशिष्ट जल का सिंचाई के लिए दोबारा इस्तेमाल करके 966 बिलियन रुपये का राजस्व सृजित किया जा सकता था
स्रोतः हॉर्टिकल्चर स्टैटिस्टिक्स एट ए ग्लांस 2018 (कृषि सहकारिता एवं कृषक विभाग, भारत सरकार), राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड 2022 के आंकड़ों का उपयोग करके लेखकों का विश्लेषण
चित्र ES3: 2021 में उपचारित अपशिष्ट जल का सिंचाई के लिए उपयोग करके उर्वरक के उपयोग में कमी लाकर 50 मिलियन रुपये बचाए जा सकते थे
स्रोत: सर्कुलर इकोनॉमी इन म्युनिसिपल सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट (2021), आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयू), भारत सरकार के आंकड़ों का उपयोग करके लेखकों द्वारा किया गया विश्लेषण
राज्यों की उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्उपयोग से संबंधित मौजूदा नीतियों की समीक्षा
हमने यह विश्लेषण भारतीय राज्यों की उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल करने से जुड़ी नीतियों की व्यापकता को समझने और भविष्य में उपचारित अपशिष्ट जल की बाजार संभावनाओं का दोहन करने की क्षमता का पता लगाने के लिए किया है। हमने पाया है कि भारत में सिर्फ 10 राज्यों के पास ही उपचारित अपशिष्ट जल को दोबारा इस्तेमाल करने की नीति मौजूद है और इनमें कुछ अंतर भी मौजूद हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता हैः
हमें देखना चाहिए कि भले ही जनवरी 2023 में आई शोधित जल के सुरक्षित पुनर्उपयोग से संबंधित राष्ट्रीय रूपरेखा कुछ चिन्हित अंतरों के बारे में दिशा-निर्देश उपलब्ध कराती हों, लेकिन राज्यों की नीतियों को काफी पहले बनी थीं और उनमें इन कमियों को दूर करने के लिए संशोधन की जरूरत है।
वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियों से मिली सीख
तीन चुने हुए देशों (स्पेन, इजराइल और सिंगापुर), जो उपचारित जल के पुनर्उपयोग में एक उन्नत स्थिति में हैं, को लेकर हमारे विश्लेषण के आधार पर हमने प्रमुख प्रेरकों, बाधाओं और सहायक कारकों को चिन्हित किया है, जिनको हमने चित्र ES4 में दिखाया है।
चित्र ES4: वैश्विक स्तर पर, उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल संबंधी नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मजबूत प्रबंधन सर्वाधिक सहायक कारक रहा।
स्रोत: लेखकों का विश्लेषण
राज्यों की वर्तमान नीतियों की समीक्षा और वैश्विक सर्वोत्तम पद्धितियों से मिली सीख के आधार पर, हम भारत में उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल से जुड़े मौजूदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ये निम्नलिखित सुझाव देते हैं:
डिस्क्लेमर : यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
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Roadmap of the methodology to assess the climate co-benefits of the SUP ban in Maharashtra
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