Home
Council on Energy, Environment and Water Integrated | International | Independent
ISSUE BRIEF
09 September, 2025 |

HAVE A QUERY?

Frequently Asked Questions

  • Why does India's transportation sector see such low levels of women’s labour force participation?

    The limited participation of women is attributable to multiple factors, such as restrictive access to training, gendered assumptions, limited supporting infrastructure, and safety concerns. For instance, women find it difficult to access vocational training specific to the transport sector since it is informally passed down from older male family members to younger ones. Even when institutions undertake gender-inclusive initiatives to support the entry of women into the sector, transport workplaces do not consider women in their design. This leads to the absence of supporting infrastructure (Swamy et al. 2021) such as secure parking spaces, restrooms, and separate clean, hygienic toilets (Gupta and Aishwarya 2024; Baruah 2017) which prevent safe, inclusive, and gender-balanced work environments for women (Gupta and Aishwarya 2024; Baruah 2017).

  • How can self-help groups (SHGs) help make the e3W transition more gender inclusive?

    SHGs are self-governing informal associations of 10–12 women established to carry out a collectively decided productive activity. SHGs of women drivers can help to identify, train, and sustain driving practices among women. These communities can perform functions, such as training women to become e3W drivers, assisting them in obtaining their licences, and ensuring that women benefit from government programmes designed for them.

  • How can EV policies be made more gender inclusive?

    EV policies must address the barriers to women’s participation in the e3W transition by accounting for the following. First, policies must be gender inclusive, taking cognisance of the different contexts and experiences of men and women. Second, policies oriented towards transitioning the existing 3W fleets to EVs must evaluate the composition of the drivers in the segment and ensure that eligibility criteria and other mandates do not exclude women because of their low or non-participation in the segment. Finally, policies must be holistic and address financial, skill development, and infrastructural barriers that may prevent women from securing the benefits of the e3W transition.

  •  

HAVE A QUERY?

Sign up for the latest on our pioneering research

REPORT
02 July, 2024 |

क्या आपके कोई सवाल हैं?

author image
प्रोग्राम एसोसिएट

Frequently Asked Questions

  • फसल अवशेष प्रबंधन क्या है?

    यह धान, गेहूं आदि फसलों की कटाई के बाद खेत में बचे हुए फसल के अवशेषों को प्रबंधित करने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है, जिसमें समावेश, मल्चिंग या बेलिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

  • किसान फसल के अवशेष क्यों जलाते हैं?

    किसान अक्सर अपने खेतों को साफ करने और अगले सीजन की फसलें बोने के लिए 15-20 दिनों की सीमित अवधि मिलने के कारण पराली को जलाने का सहारा लेते हैं। इसके अलावा, फसल अवशेषों के लिए सीमित बाजार और फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों तक पहुंच की कमी भी किसानों को अपनी फसल के अवशेषों को जलाने का कारण देती है।

  • भारत फसल अवशेषों का प्रबंधन कैसे कर सकता है?

    भारत फसल विविधीकरण (crop diversification) के माध्यम से फसल अवशेष का प्रभावी ढंग से प्रबंधन कर सकता है, जिसमें कम समय में तैयार होने वाली और कम भूसा पैदा करने वाली धान की किस्मों, जैसे सरकार द्वारा प्रचारित PR126, PR128, PR121 इत्यादि, की खेती करना शामिल है। सुपर सीडर (Super Seeder) आदि जैसे सीआरएम (CRM) मशीनों का उचित इस्तेमाल और उद्योगों व कंप्रेस्ड बायोगैस (compressed biogas) संयंत्रों में उपयोग करने जैसे एक्स-सीटू विकल्पों को विस्तार देने से भी बचे हुए फसल अवशेष का प्रभावी उपयोग होता है।

  • बड़े पैमाने पर फसल अवशेषों को जलाने से हवा की गुणवत्ता पर कितना प्रभाव पड़ता है?

    एक टन फसल अवशेष जलाने से 1460 किलो कार्बन डाई ऑक्साइड, 6 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड, 3 किलो पार्टिकुलेट मैटर और 2 किलो सल्फर डाई ऑक्साइड निकलता है। वैज्ञानिक आकलन बताते हैं कि फसल अवशेषों को जलाने से भारत के PM2.5 उत्सर्जन में प्रतिवर्ष लगभग 15 प्रतिशत का योगदान होता है। दिल्ली का डिसीजन सपोर्ट सिस्टम का अनुमान है कि उत्तर-पश्चिमी राज्यों में पराली जलाने से दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में सर्वाधिक आग जलाने की अवधि के दौरान लगभग 20-30 प्रतिशत का योगदान होता है।

  • फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कौन सी मशीनें उपलब्ध हैं?

    फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाली मशीनें सुपर सीडर, रोटावेटर, ज़ीरो-टिल-ड्रिल और हैप्पी सीडर हैं, जो खेत में ही (इन-सीटू) फसल अवशेषों के प्रबंधन में इस्तेमाल होती हैं, वहीं बेलर, रेकर आदि खेत से बाहर (एक्स-सीटू) फसल अवशेष प्रबंधन में इस्तेमाल होती हैं।

  •  

क्या आपके कोई सवाल हैं?

author image
प्रोग्राम एसोसिएट

Sign up for the latest on our pioneering research

ISSUE BRIEF
21 February, 2023 |

क्या आपके कोई प्रश्न हैं?

author image
रिसर्च एनालिस्ट

क्या आपके कोई प्रश्न हैं?

author image
रिसर्च एनालिस्ट

Sign up for the latest on our pioneering research

02 September, 2025 |

Sign up for the latest on our pioneering research

REPORT
07 February, 2024 |

क्या आपके कोई सवाल हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड

Frequently Asked Questions

  • ई-साइकिल की संकल्पना क्या है? क्या भारत में इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदना उपयुक्त है?

    ई-साइकिलें ऐसी साइकिलें होती हैं, जिनमें एक सहायक पॉवर यूनिट लगी होती है, जो पैडल चलाने में मदद करती है या पूरी तरह से थ्रॉटल-कंट्रोलिंग प्रोपेलिंग फोर्स (propelling) उपलब्ध कराती है। हमारा विश्लेषण संकेत देता है कि ई-साइकिल और कम गति वाली ई-मोपेड अपने आईसीई और ईवी समकक्ष वाहनों की तुलना में लगभग 56-70 प्रतिशत किफायती हैं। इसलिए, ये भारतीय बाजार में अन्य मोटर चालित दोपहिया वाहनों की तुलना में एक किफायती समाधान हो सकती हैं।

  • ई-बाइक/ई-साइकिल पर्यावरण को कैसे प्रभावित करते हैं?

    ई-साइकिल 5-10 किलोमीटर की दूरी के लिए एक फायदेमंद और मोटर चालित आंतरिक दहन इंजन (ICE) दोपहिया वाहनों का एक अच्छा विकल्प हो सकती हैं। इस प्रकार से, ई-साइकिल दोपहिया वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को घटा सकती हैं, जो वर्तमान में भारतीय सड़कों पर कुल मोटर चालित वाहनों का सबसे बड़ा हिस्सा है।

  • ई-साइकिलों के सामाजिक प्रभाव क्या हैं?

    अपने सर्वेक्षण से हम पाते हैं कि अधिकांश लाभार्थी (70-75 प्रतिशत) मानते हैं कि इ-साइकिल थकान को घटाएगी और कार्य कुशलता में सुधार लाएगी, जिससे उन्हें अधिक आय मिल सकेगी। हमारा विश्लेषण यह भी संकेत देता है कि ई-साइकिल को अपनाने से सालाना लगभग 70-80 प्रतिशत की बचत होती है। यह लाभार्थियों की खर्च करने योग्य आय को बढ़ा सकती है, जो बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवा की सुविधा और बेहतर पारिवारिक व सामाजिक सहायता बढ़ाता है।

  • ई-साइकिल क्यों ग्रामीण इलाकों के लिए एक आकर्षक विकल्प है?

    भारत के कई ग्रामीण इलाकों में, कम और बिखरी हुई मांग के कारण सार्वजनिक परिवहन और साझा किए जाने वाले वाहन अव्यवहार्य (unviable) हैं, जिससे लोगों को आवागमन के लिए पेट्रोल से चलने वाले निजी दोपहिया वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। कुल स्वामित्व लागत (TCO) बताती है कि ई-साइकिल और कम गति वाले ई-मोपेड पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों की तुलना में लगभग 70% सस्ते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से फायदेमंद हैं।

  • ई-साइकिलों का भविष्य में क्या रुझान रहने वाला है?

    हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी संस्थानों में ई-साइकिलों के लिए संभावना है। केवल केरल में ही आंगनवाड़ी, आशा और एसएचजी कार्यकर्ताओं के बीच लगभग 77,000 ई-साइकिलों की मांग है।

  •  

क्या आपके कोई सवाल हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड

Sign up for the latest on our pioneering research

REPORT
11 June, 2020 |

क्या आपके कोई प्रश्न हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड

क्या आपके कोई प्रश्न हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड

Sign up for the latest on our pioneering research

REPORT
06 January, 2022 |

HAVE A QUERY?

author image
Programme Associate

HAVE A QUERY?

author image
Programme Associate

Sign up for the latest on our pioneering research

REPORT
09 December, 2023 |

क्या आपके कोई प्रश्न हैं?

author image
प्रोग्राम एसोसिएट

Frequently Asked Questions

  • अटल भूजल योजना क्या है?

    अटल भूजल योजना भारत सरकार द्वारा 2019 में शुरू की गई एक केंद्रीय योजना है, जिसका उद्देश्य विभिन्न संचालित योजनाओं के बीच सामंजस्य और स्थानीय समुदायों व हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सतत भूजल प्रबंधन में सुधार लाना है। इसे 2020-21 से 2024-25 तक सात राज्यों - गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के चुनिंदा क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय 6,000 करोड़ रुपये है।

  • हम भूजल को कैसे सतत (सस्टेनेबल) बना सकते हैं?

    भूजल के बारे में अपने सभी निर्णयों में संसाधनों का अन्य संसाधनों और कारकों के साथ अंतर्संबंधों को समझते और स्वीकार करके भूजल के उपयोग को सस्टेनेबल बनाया जा सकता है। इसमें पेयजल, कृषि, पशुपालन, उद्योग, ऊर्जा, बिजली और अन्य इकोसिस्टम सर्विस के लिए संसाधनों की आवश्यकता; इस पर वर्तमान, निकट भविष्य और भविष्य में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव; और लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक वास्तविकताओं के अंतर्संबंध शामिल हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, हम वर्तमान में संसाधन का इस तरह से उपयोग कर सकते हैं कि वह आगामी पीढ़ियों की जरूरतों के लिए पर्याप्त मात्रा में बचे रहे।

  • भूजल प्रबंधन सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में कैसे मदद कर सकता है?

    यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटीज इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ के अनुसार, सतत विकास के लिए जल महत्वपूर्ण है। भूजल, जो पृथ्वी पर उपलब्ध मीठे पानी के संसाधन का लगभग 99% है, 13 सतत विकास लक्ष्यों के तहत 53 एसडीजी लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक साबित हो सकता है।

  • भूजल प्रबंधन में समुदाय को कैसे शामिल किया जा सकता है?

    भूजल प्रबंधन में समुदायों को जोड़ने के बहुत से तरीके हैं, जो समुदाय के हित और उस क्षेत्र में प्रभावी कानूनी और नीतिगत प्रावधानों पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, समुदाय को स्थानीय स्तर पर भूजल आवंटन तय करने, इसकी गुणवत्ता व मात्रा की निगरानी करने, प्रबंधन योजनाओं और मांग घटाने वाले उपायों को तैयार व लागू करने, संसाधन के उपयोग व प्रशासन के संबंध में अन्य हितधारकों के साथ बातचीत करने, संसाधन की सुरक्षा करने और संसाधनों के आवंटन या उपयोग से जुड़े विवादों को सुलझाने या बातचीत करने में शामिल किया जा सकता है।

  •  

क्या आपके कोई प्रश्न हैं?

author image
प्रोग्राम एसोसिएट

Sign up for the latest on our pioneering research

04 August, 2023 |

क्या आपके कोई प्रश्न हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड

Frequently Asked Questions

  • ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

    ग्रीन हाइड्रोजन ऐसी हाइड्रोजन है, जिसे पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के लिए अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। भविष्य के इस ईंधन को विकेंद्रीकृत तरीके से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने की क्षमता विशेष रूप से उपयोगी बनाती है।

  • भारत का नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है?

    नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का एक वैश्विक केंद्र बनाना है, साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन और इसके विभिन्न किस्मों के उपयोग और निर्यात की मांग पैदा करना है। यह भारत की जलवायु महत्वाकांक्षाओं में योगदान करेगा और देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनने में सहायक होगा। मिशन से अर्थव्यवस्था का प्रमुखता से डीकार्बोनाइजेशन होगा और जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता घटेगी।

  • क्या भारत के पास हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण और परिवहन के लिए मानक हैं?

    भारत के पास पहले से ही प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (पीईएम), अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर और एनियन इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन इलेक्ट्रोलाइजर (एईएम) का उपयोग करके हाइड्रोजन को उत्पादित करने के लिए मानक मौजूद हैं, लेकिन सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइजर सेल (एसओईसी) के लिए मानक नहीं हैं। भारत के पास हाइड्रोकार्बन रिफॉर्मिंग के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भी मानक हैं। हालांकि, भारत के पास प्राकृतिक गैस या बायोमास पायरोलिसिस जैसे वैकल्पिक साधनों के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए मानक नहीं हैं। भारत के पास हाइड्रोजन के गैसीय भंडारण के लिए भी मानक हैं, लेकिन तरल हाइड्रोजन के थोक भंडारण के लिए मानकों को विकसित करने की जरूरत है। भारत के पास फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ऑनबोर्ड हाइड्रोजन भंडारण के लिए भी मानक हैं। हालांकि, भारत के पास गैसीय और तरल हाइड्रोजन के भंडारण और ढुलाई के लिए मानक हैं, लेकिन इसकी पाइपलाइनों के माध्यम से ढुलाई के लिए मानक नहीं हैं।

  •  

क्या आपके कोई प्रश्न हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड

Sign up for the latest on our pioneering research

REPORT
22 June, 2024 |

क्या आपके पास कोई प्रश्न हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड

Frequently Asked Questions

  • क्या भारत बाढ़ के खतरे में है?

    सीईईडब्ल्यू विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के 57 प्रतिशत जिले भीषण बाढ़ की घटनाओं और उनके बढ़ते प्रभावों के प्रति सुभेद्य ( vulnerable) हैं। बाढ़, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में, अस्पताल, शिक्षा केंद्र, परिवहन सुविधाएं इत्यादि जैसे प्रमुख सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नाजुक (critical) बना सकती है। इसके अलावा, यह बिजली और पानी सहित बुनियादी और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति बाधित कर सकती है। इसलिए, शहरी क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन के लिए ठोस कार्रवाई करना एक जरूरी लक्ष्य है।

  • भारत में शहरी बाढ़ के मुख्य कारण क्या हैं?

    हाल के वर्षों में, भारतीय शहरों में बाढ़ के रुझान में वृद्धि देखी गई है। इनमें से नवंबर 2021 में चेन्नई, 2022 में बेंगलुरु और अहमदाबाद, जुलाई 2023 में दिल्ली के कुछ हिस्सों और सितंबर 2023 में नागपुर में आई बाढ़ सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं। शहरी इलाकों में बाढ़ के बढ़ते जोखिम के प्रमुख कारणों में बारिश के पैटर्न पर जलवायु परिवर्तन के साथ तेज और अनियोजित शहरीकरण का संयुक्त प्रभाव है। एक तरफ, जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की सघनता से बार-बार और भारी बारिश होती है,जो कई शहरों की जल निकासी व्यवस्था पर भारी दबाव डालती है। दूसरी तरफ, लगातार बढ़ते शहरी क्षेत्रों में अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था तूफान बारिश की घटनाओं के समय निर्मित क्षेत्रों से अतिरिक्त अपवाह के कारण बाढ़ को बहुत विशाल बना देती है।

  • भारत कैसे शहरी बाढ़ का बेहतर प्रबंधन कर सकता है?

    शहरी क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन के लिए तैयार होने और दीर्घकालिक जोखिम को घटाने के लिए स्थानीय स्तर की कार्य योजनाएं बनाना बहुत जरूरी है। ठाणे सिटी एक्शन प्लान फॉर फ्लड रिस्क मैनेजमेंट 2024 के जोखिम आधारित दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना में उल्लिखित सिद्धांतों के अनुरूप नगर निगम प्राधिकरणों को अपने-अपने शहरों की आवश्यकता अनुसार बाढ़ नियंत्रण से संबंधित कार्य योजनाएं बनानी चाहिए। ऐसी कार्य योजनाओं में शहर की अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने के लिए त्वरित, कार्रवाई योग्य और व्यापक सुझाव दिए जाने चाहिए, जिससे शहरी बाढ़ के प्रभावी प्रबंधन में सहायता मिल सके।

  • क्या ठाणे में शहरी बाढ़ का खतरा है?

    हां, ठाणे शहरी बाढ़ के जोखिम वाला क्षेत्र है। तटीय शहर होने के कारण ठाणे में औसत वार्षिक वर्षा 2932 मिमी है, जिसमें उच्च अंतर-वार्षिक परिवर्तनशीलता (inter-annual variability) होती है। सीईईडब्ल्यू विश्लेषण के अनुसार, के विश्लेषण के अनुसार, 1970 और 2021 के बीच, अधिकतम दैनिक वर्षा 72 मिलीमीटर (मिमी) से 267 मिमी तक रही, जिसके कारण बारिश वाले वर्षों में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं हुईं। यह स्थिति बढ़ते शहरीकरण और अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था (डिजाइन) के कारण और भी खराब हो जाती है, जिससे तूफानी बारिश का सही से प्रबंधन नहीं हो पाता है।

  •  

क्या आपके पास कोई प्रश्न हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड

Sign up for the latest on our pioneering research

Pages