Frequently Asked Questions
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क्या भारत बाढ़ के खतरे में है?
सीईईडब्ल्यू विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के 57 प्रतिशत जिले भीषण बाढ़ की घटनाओं और उनके बढ़ते प्रभावों के प्रति सुभेद्य ( vulnerable) हैं। बाढ़, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में, अस्पताल, शिक्षा केंद्र, परिवहन सुविधाएं इत्यादि जैसे प्रमुख सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नाजुक (critical) बना सकती है। इसके अलावा, यह बिजली और पानी सहित बुनियादी और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति बाधित कर सकती है। इसलिए, शहरी क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन के लिए ठोस कार्रवाई करना एक जरूरी लक्ष्य है।
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भारत में शहरी बाढ़ के मुख्य कारण क्या हैं?
हाल के वर्षों में, भारतीय शहरों में बाढ़ के रुझान में वृद्धि देखी गई है। इनमें से नवंबर 2021 में चेन्नई, 2022 में बेंगलुरु और अहमदाबाद, जुलाई 2023 में दिल्ली के कुछ हिस्सों और सितंबर 2023 में नागपुर में आई बाढ़ सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं। शहरी इलाकों में बाढ़ के बढ़ते जोखिम के प्रमुख कारणों में बारिश के पैटर्न पर जलवायु परिवर्तन के साथ तेज और अनियोजित शहरीकरण का संयुक्त प्रभाव है। एक तरफ, जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की सघनता से बार-बार और भारी बारिश होती है,जो कई शहरों की जल निकासी व्यवस्था पर भारी दबाव डालती है। दूसरी तरफ, लगातार बढ़ते शहरी क्षेत्रों में अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था तूफान बारिश की घटनाओं के समय निर्मित क्षेत्रों से अतिरिक्त अपवाह के कारण बाढ़ को बहुत विशाल बना देती है।
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भारत कैसे शहरी बाढ़ का बेहतर प्रबंधन कर सकता है?
शहरी क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन के लिए तैयार होने और दीर्घकालिक जोखिम को घटाने के लिए स्थानीय स्तर की कार्य योजनाएं बनाना बहुत जरूरी है। ठाणे सिटी एक्शन प्लान फॉर फ्लड रिस्क मैनेजमेंट 2024 के जोखिम आधारित दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना में उल्लिखित सिद्धांतों के अनुरूप नगर निगम प्राधिकरणों को अपने-अपने शहरों की आवश्यकता अनुसार बाढ़ नियंत्रण से संबंधित कार्य योजनाएं बनानी चाहिए। ऐसी कार्य योजनाओं में शहर की अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने के लिए त्वरित, कार्रवाई योग्य और व्यापक सुझाव दिए जाने चाहिए, जिससे शहरी बाढ़ के प्रभावी प्रबंधन में सहायता मिल सके।
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क्या ठाणे में शहरी बाढ़ का खतरा है?
हां, ठाणे शहरी बाढ़ के जोखिम वाला क्षेत्र है। तटीय शहर होने के कारण ठाणे में औसत वार्षिक वर्षा 2932 मिमी है, जिसमें उच्च अंतर-वार्षिक परिवर्तनशीलता (inter-annual variability) होती है। सीईईडब्ल्यू विश्लेषण के अनुसार, के विश्लेषण के अनुसार, 1970 और 2021 के बीच, अधिकतम दैनिक वर्षा 72 मिलीमीटर (मिमी) से 267 मिमी तक रही, जिसके कारण बारिश वाले वर्षों में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं हुईं। यह स्थिति बढ़ते शहरीकरण और अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था (डिजाइन) के कारण और भी खराब हो जाती है, जिससे तूफानी बारिश का सही से प्रबंधन नहीं हो पाता है।
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